(N/A) संवेदी अंग पर्यावरण में होने वाले सभी प्रकार के परिवर्तनों का पता लगाते हैं और उपयुक्त संकेतों को $CNS$ (केंद्रीय तंत्रिका तंत्र) तक भेजते हैं,जहाँ सभी इनपुट संसाधित और विश्लेषित किए जाते हैं। इसके बाद संकेत मस्तिष्क के विभिन्न भागों/केंद्रों को भेजे जाते हैं। इस प्रकार आप पर्यावरण में होने वाले परिवर्तनों को महसूस कर सकते हैं।
हम नाक के माध्यम से गंध सूंघ सकते हैं और जीभ के माध्यम से स्वाद का पता लगा सकते हैं।
- नाक में श्लेष्म (mucous) से ढके संवेदी रिसेप्टर्स होते हैं जो गंध की उत्तेजना प्राप्त करते हैं; इन्हें घ्राण रिसेप्टर्स (olfactory receptors) कहा जाता है।
ये घ्राण उपकला (olfactory epithelium) से बने होते हैं,जिसमें तीन प्रकार की कोशिकाएं होती हैं:
$(a)$ द्विध्रुवीय घ्राण तंत्रिका कोशिकाएं
$(b)$ स्तंभाकार उपकला कोशिकाएं
$(c)$ श्लेष्म ग्रंथियां
घ्राण रिसेप्टर्स घ्राण बल्ब (olfactory bulb) से जुड़े होते हैं,जो लिम्बिक सिस्टम का एक विस्तार है।
- घ्राण बल्ब मस्तिष्क के प्रमस्तिष्क गोलार्द्ध के अग्र भाग में,एथमोइड हड्डी के नीचे स्थित होता है।
- नाक और जीभ दोनों घुलनशील रसायनों को पहचानते हैं। स्वाद और गंध में,रासायनिक संवेदनाएं कार्यात्मक रूप से समान और परस्पर जुड़ी होती हैं।
- जीभ स्वाद कलिकाओं (taste buds) के माध्यम से स्वाद की पहचान करती है,जिनमें स्वाद रिसेप्टर्स होते हैं।
प्रत्येक भोजन या पेय का स्वाद मस्तिष्क में विभिन्न इनपुट के साथ जुड़ा होता है,जो जटिल स्वादों की अनुभूति देता है।